normal delivery kaise hoti hai hospital mein

डिलीवरी कैसे होती है हॉस्पिटल में


मैं हूं कृष्टि मुंबई की रहने वाली और मैं अपनी फर्स्ट डिलीवरी की फिलिंग आपसे शेयर कर रही हूं लाइव वीडियो के साथ

मुझे 37 वीक की प्रेगनेंसी हो गई थी

तब एक सोमवार की सुबह मैंने पहली बार अपने पेट मैं हल्के हल्के दर्द का एक अजीब सा दर्द एहसास किया उस टाइम

दर्द स्टार्ट होते ही मेरे पति हॉस्पिटल लेकर गए और मुझे लेबर वार्ड में भर्ती कर दिया गया
 

और तुरंत ही डॉक्टर ने पेट पर मेरे बच्चे की धड़कन चेक की और मेरी बच्चेदानी का मुख चेक किया और बताया कि आपका प्रसव पीड़ा स्टार्ट हो गई है और बोला बच्चा दानी का मुख नरम होकर फैल रहा है


मेरी टमी में संकुचन धीरे-धीरे तेज और हर 15 से बीस मिनट में होने होने लगे और कमर पीठ के निचले हिस्से में दर्द और मरोड़ लगातार बढ़ते जा रहे थे


धीरे-धीरे में इन दर्द से तड़पने लगी बट मेरा पति मेरे साथ ही था वह मुझे सपोर्ट करने की पूरी कोशिश कर रहा था बट दर्द के मारे मेरी चीखें निकल रही थी

और इतना ही नहीं संकुचन धीरे-धीरे तेज और जल्दी-जल्दी हर पाँच से 10 मिनट में होने लगे


जैसे ही दर्द का मरोड़ा आता है उस टाइम मैं बेड पर तड़पते हुए करवट बदलने लग जाती थी और मैं अपनी चीखे नहीं रोक पा रही थी इसी के साथ मेरा पति मुझे comfort position देने की कोशिश कर रहा था

और इतने में ही पानी की थैली फटती जाति है जिसमें बहुत सारा तरल पदार्थ बहने लगता है फिर बूंद-बूंद करके टपकने लगता है

जब से यह दर्द स्टार्ट हुआ था अब तक मुझे 6 घंटे हो चुके थे इस दर्द से तड़पते हुए

और पानी बहने के साथ ही मुझे डॉक्टर दूसरे रूम में लेकर गए

जहां पर फिर डॉक्टर ने मेरे बच्चे की धड़कन चेक की और साथ ही बच्चेदानी का मुख चेक किया और बोला की बच्चेदानी का मुंह पूरा खुल चुका है

उस दौरान दर्द के मरोड़े मुझे इस तरह से आ रहे हैं हर 2 से 3 मिनट में आ रहे थे और मुझे यह दर्द बर्दाश्त नहीं हो रहा था और दर्द के मरोड़े इतनी तेज थे कि मैं अपने आप को बेबस महसूस कर रही थी बट उस दौरान मुझे डॉक्टर बहुत अधिक जोर लगाने के लिए प्रेरित कर रहे थे

और ऐसे जोर लगाते हुए मुझे 30 मिनट हो चुके थे बट उन दर्द के मरोड़ के साथ डॉक्टर मुझे बोल रहे थे कि जोर लगाते रहो बेबी का सिर दिख रहा है बेबी का सिर दिख रहा है बस मुझे यही सुनाई दे रहा था


बार-बार डॉक्टर मेरे पेट पर बच्चे की धड़कन चेक कर रही थी और मुझे बोली कि यदि आप जोर नहीं लगाओगे तो हमें आपकी योनि पर कट लगाकर बच्चे का सिर बाहर निकालना पड़ेगा

पर जोर लगाते लगाते मैं इतने थक चुकी थी और मैं बेबस महसूस कर रही अब तो मेरी चीखे भी अच्छे से नहीं निकल रही थी बस मैं तड़प रही थी उस दौरान मेरा पति मुझे इतना सपोर्ट कर रहा था और मुझे कह रहा था कि बस एक बार और आप जोर लगाओ


फिर पता नहीं मेरे अंदर कहां से जोर आया और मैं इतना जोर लगाई की चीखें मेरी जरूर निकल गई बट फाइनली मेरा बेबी का सिर बाहर आ चुका था बट डॉक्टर बार-बार जोर लगाने के लिए ही कह रही थी बट में कोई जोर नहीं लगा पा रही थी

बच्चे का सिर बाहर आने के बाद डॉक्टर बच्चे के कंधों को बाहर निकालने की कोशिश कर रही थी

यह मैं महसूस कर रही थी फिर मैं एक बार और जोर लगाने की कोशिश करती हूं ऐसे ही धीरे-धीरे पूरे बच्चे का शरीर बाहर आ जाता है बट इस दौरान भी मैं दर्द से बहुत तड़प रही थी

इस दौरान जो यह दर्द हुआ था मुझे असहनीय दर्द था जो मैं इससे पहले कभी ऐसा दर्द नहीं महसूस की थी


इसी के साथ मुझे बच्चे की चीख भी सुनाई देने लगी चीख सुनाई देने के साथ मैं अपना दर्द भूलती ही जा रही थी

बच्चे के पैदा होने के बाद umbilical cord को डॉक्टर या नर्स काट देती हैं

और नर्स बच्चे को एक कपड़े में लपेटकर मेरी छाती पर रख देती है उस दौरान भी मेरे दर्द हो रहे थे पर मैं वह दर्द भूल कर अपने बच्चे को ही देख रही थी वह रो रहा था और उसकी आंखें बंद थी

बच्चे के जन्म के 10 मिनट बाद ही डॉक्टर मेरे बच्चेदानी में हाथ देकर उस प्लेसेंटा को बाहर निकालने की कोशिश करता है और 5 मिनट में ही मेरा प्लेसेंटा भी बाहर आ जाता है


बच्चे के जन्म के 30 मिनट बाद ही मैं नॉर्मल होने लगती हूं और मैं अपने बच्चे को पहली बार दूध पिलाती हूं

मैं और मेरा पति अपने बच्चे की और ही देख रहे थे


अब तक दर्द स्टार्ट होने से बच्चे को दूध पिलाने तक मुझे 16 घंटे हो चुके थे


पहली डिलीवरी का मेरा एक्सपीरियंस इस प्रकार था जो मैंने आपके साथ शेयर किया

मेरी डिलीवरी का वीडियो मैंने बनवाया है वह मैं आपके साथ शेयर करी हूं तो प्लीज आपको यह वीडियो अच्छा लगा तो आप हर प्रेग्नेंट महिला के साथ यह वीडियो शेयर कर सकते हैं
हिंदी में विडियो देखे  link https://youtu.be/ohHgRXq2v50
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Nursing Officer

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1 टिप्पणियाँ:

  1. Considering a kidney transplant philippine? It's vital to select accredited hospitals with experienced surgeons. Ensure thorough pre- and post-operative plans are in place to handle recovery and manage anti-rejection medications effectively. Also, consider the legal and ethical aspects of sourcing donor organs to ensure compliance with both local and international laws.





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